Vedasara Shiv Stotram भगवान शिव की महिमा का वर्णन करने वाला एक अत्यंत प्रसिद्ध एवं दार्शनिक स्तोत्र है, जिसकी रचना परंपरागत रूप से जगद्गुरु आदि शंकराचार्य को समर्पित मानी जाती है।
इस स्तोत्र में भगवान शिव को वेदों के सार, निर्गुण-निराकार परब्रह्म तथा समस्त सृष्टि के आधार के रूप में स्तुत किया गया है। इसमें शिव के अद्वैत स्वरूप, उनकी अनंत करुणा तथा भक्तों के कल्याणकारी रूप का अत्यंत सुंदर वर्णन मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा और भक्ति के साथ श्री वेदसार शिव स्तोत्रम् का पाठ करने से मन को शांति, भय एवं नकारात्मकता से मुक्ति, आध्यात्मिक उन्नति तथा भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। विशेष रूप से सोमवार, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि तथा शिव पूजा के अवसर पर इसका पाठ अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
पशूनां पतिं पापनाशं परेशं
गजेन्द्रस्य कृत्तिं वसानं वरेण्यम् ।
जटाजूटमध्ये स्फुरद्गाङ्गवारिं
महादेवमेकं स्मरामि स्मरारिम् ॥ १ ॥
महेशं सुरेशं सुरारार्तिनाशं
विभुं विश्वनाथं विभूत्यङ्गभूषम् ।
विरूपाक्षमिन्द्वर्कवह्नित्रिनेत्रं
सदानन्दमीडे प्रभुं पञ्चवक्त्रम् ॥ २ ॥
गिरीशं गणेशं गले नीलवर्णं
गवेन्द्राधिरूढं गणातीतरूपम् ।
भवं भास्वरं भस्मना भूषिताङ्गं
भवानीकलत्रं भजे पञ्चवक्त्रम् ॥ ३ ॥
शिवाकान्त शम्भो शशाङ्कार्धमौले
महेशान शूलिन्न जटाजूटधारिन् ।
त्वमेको जगद्व्यापको विश्वरूप
प्रसीद प्रसीद प्रभो पूर्णरूप ॥ ४ ॥
परात्मानमेकं जगद्बीजमाद्यं
निरीहं निराकारमोङ्कारवेद्यम् ।
यतो जायते पाल्यते येन विश्वं
तमीशं भजे लीयते यत्र विश्वम् ॥ ५ ॥
न भूमिर्न चापो न वह्निर्न वायु
र्न चाकाश आस्ते न तन्द्रा न निद्रा ।
न ग्रीष्मो न शीतो न देशो न वेषो
न यस्यास्ति मूर्तिस्त्रिमूर्तिं तमीडे ॥ ६ ॥
अजं शाश्वतं कारणं कारणानां
शिवं केवलं भासकं भासकानाम् ।
तुरीयं तमः पारमाद्यन्तहीनं
प्रपद्ये परं पावनं द्वैतहीनम् ॥ ७ ॥
नमस्ते नमस्ते विभो विश्वमूर्ते
नमस्ते नमस्ते चिदानन्दमूर्ते ।
नमस्ते नमस्ते तपोयोगगम्य
नमस्ते नमस्ते श्रुतिज्ञानगम्य ॥ ८ ॥
प्रभो शूलपाणे विभो विश्वनाथ
महादेव शम्भो महेश त्रिनेत्र ।
शिवाकान्त शान्त स्मरारे पुरारे
त्वदन्यो वरेण्यो न मान्यो न गण्यः ॥ ९ ॥
शम्भो महेश करुणामय शूलपाणे
गौरीपते पशुपते पशुपाशनाशिन् ।
काशीपते करुणया जगदेतदेक-
स्त्वं हंसि पासि विदधासि महेश्वरोऽसि ॥ १० ॥
त्वत्तो जगद्भवति देव भव स्मरारे
त्वय्येव तिष्ठति जगन्मृड विश्वनाथ ।
त्वय्येव गच्छति लयं जगदेतदीश
लिङ्गात्मकं हर चराचरविश्वरूपिन् ॥ ११ ॥
॥ श्रीमच्छंकराचार्यकृत वेदसारशिवस्तव सम्पूर्णम ॥
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🪵 3. गोमुखी जप बैग
जप माला को सुरक्षित एवं स्वच्छ रखने तथा पारंपरिक विधि से जप करने के लिए गोमुखी बैग उपयोगी होता है।
🪔 4. पीतल का पूजा दीपक
भगवान शिव की पूजा से पूर्व घी या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करना शुभ माना जाता है। पीतल का दीपक दैनिक पूजा के लिए उत्तम विकल्प है।
🥛 5. शिवलिंग अभिषेक पात्र (जलधारा पात्र)
भगवान शिव का जल, दूध, गंगाजल एवं पंचामृत से अभिषेक करने के लिए तांबे या पीतल का अभिषेक पात्र अत्यंत उपयोगी होता है।
🛕 6. भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग
घर के मंदिर में शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित कर प्रतिदिन पूजा एवं स्तोत्र पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
🔔 7. पीतल की पूजा घंटी
पूजा आरंभ करने से पहले घंटी बजाना सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण भाग है। इससे पूजा का वातावरण अधिक पवित्र और एकाग्रता पूर्ण बनता है।
🪷 8. संपूर्ण पूजा थाली सेट
यदि आप नियमित शिव पूजा करते हैं, तो दीपक, घंटी, अगरबत्ती स्टैंड, रोली पात्र, अभिषेक पात्र आदि सहित एक संपूर्ण पूजा थाली सेट उपयोगी रहेगा।
📚 9. शिव पुराण पुस्तक
भगवान शिव की महिमा, लीलाओं, ज्योतिर्लिंगों तथा सनातन धर्म के गूढ़ ज्ञान को समझने के लिए शिव पुराण का अध्ययन अवश्य करें।
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।। ॐ नमः शिवाय ।।