
Maha Shivaratri 2027, one of the most sacred nights dedicated to Lord Shiva, falls on Saturday, 6 March 2027, marking the Phalguna Krishna Paksha Chaturdashi tithi, with the most auspicious Nishita Kaal Puja window occurring around midnight, roughly 12:07 AM to 12:56 AM (Delhi timings), while devotees also observe worship across the night’s four prahars using water, curd, ghee, and honey for successive abhishekam offerings. According to Hindu mythology, this night commemorates either Lord Shiva’s cosmic Tandava dance of creation and destruction, his sacred marriage to Goddess Parvati, or the legend of him consuming the halahal poison during the Samudra Manthan to save the universe, earning him the name Neelkanth; devotees mark the occasion with day-long fasting, all-night vigils (jagran), chanting of “Om Namah Shivaya” and the Mahamrityunjaya mantra, and grand celebrations at major Shiva temples such as Kashi Vishwanath in Varanasi, Somnath in Gujarat, and Mahakaleshwar in Ujjain, where Varanasi additionally hosts a symbolic Shiv Baraat procession reenacting the divine wedding.
महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण हिंदू पर्वों में से एक है। यह “शिव और शक्ति के मिलन” की रात मानी जाती है, जब भक्त रातभर जागरण, उपवास और पूजा-अर्चना कर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस लेख में जानिए महाशिवरात्रि 2027 की सही तारीख, निशिता काल पूजा मुहूर्त, चारों प्रहर पूजा समय, व्रत नियम और पूजा विधि की संपूर्ण जानकारी।
महाशिवरात्रि 2027 कब है?
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। वर्ष 2027 में यह पावन पर्व शनिवार, 6 मार्च 2027 को मनाया जाएगा।
शुभ मुहूर्त (6-7 मार्च 2027, दिल्ली समयानुसार)
| अनुष्ठान | समय |
|---|---|
| चतुर्दशी तिथि प्रारंभ | 5 मार्च 2027, दोपहर बाद |
| चतुर्दशी तिथि समाप्त | 7 मार्च 2027, दोपहर के आसपास |
| निशिता काल पूजा मुहूर्त (सर्वाधिक शुभ) | रात्रि लगभग 12:07 बजे से 12:56 बजे तक (7 मार्च की रात) |
| रात्रि प्रथम प्रहर पूजा | सायं लगभग 6:24 बजे से 9:27 बजे तक |
| रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा | रात्रि लगभग 9:27 बजे से 12:30 बजे तक |
| रात्रि तृतीय प्रहर पूजा | मध्यरात्रि लगभग 12:30 बजे से 3:33 बजे तक |
| रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा | प्रातः लगभग 3:33 बजे से 6:24 बजे तक |
| पारण (व्रत खोलने) का समय | 7 मार्च 2027, सूर्योदय के बाद |
(नोट: पंचांग भेद और शहर के अनुसार इन समयों में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। कृपया अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि अवश्य करें।)
महाशिवरात्रि का महत्व और पौराणिक कथा
महाशिवरात्रि से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार, इसी रात भगवान शिव ने सृष्टि की रचना और संहार का प्रतीक तांडव नृत्य किया था। दूसरी प्रचलित कथा के अनुसार, इसी शुभ रात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था, इसलिए यह पर्व विवाहित स्त्रियों तथा योग्य वर की कामना करने वाली अविवाहित कन्याओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
एक अन्य कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब हलाहल विष निकला और सृष्टि पर संकट आ गया, तब भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए वह विष अपने कंठ में धारण कर लिया, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे “नीलकंठ” कहलाए। इसी घटना की याद में शिवभक्त रातभर जागरण कर भोलेनाथ की आराधना करते हैं।
अन्य हिंदू पर्वों की तरह यह दिन में नहीं बल्कि रात्रि में मनाया जाने वाला अनूठा पर्व है, इसीलिए इसे “शिव की महान रात्रि” कहा जाता है।
महाशिवरात्रि पूजा विधि
- संकल्प और स्नान: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान शिव की पूजा तथा व्रत का संकल्प लें।
- शिवलिंग अभिषेक: शिवलिंग को जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से पंचामृत अभिषेक कराएं।
- बेलपत्र और पूजन सामग्री अर्पित करें: शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल, चंदन और भस्म अर्पित करें।
- चार प्रहर की पूजा: शास्त्रों के अनुसार रात को चार प्रहरों में बांटकर पूजा करने का विधान है, हर प्रहर में अलग-अलग द्रव्य से अभिषेक किया जाता है — जल-दूध, दही, घी और मधु-शर्करा।
- मंत्र जाप: “ॐ नमः शिवाय” तथा महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
- निशिता काल पूजा: मध्यरात्रि के शुभ मुहूर्त में विशेष पूजा और आरती करें, क्योंकि यही वह समय माना जाता है जब भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे।
- रात्रि जागरण: पूरी रात भजन-कीर्तन और शिव कथा श्रवण करते हुए जागरण करें।
- पारण: अगले दिन सूर्योदय के बाद स्नान कर व्रत का पारण करें।
व्रत में क्या खाएं, क्या न खाएं
खा सकते हैं: फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू-सिंघाड़े का आटा, सेंधा नमक, मखाना।
वर्जित है: अन्न (चावल, गेहूं, दाल), प्याज-लहसुन और तामसिक भोजन। कुछ भक्त निर्जला व्रत भी रखते हैं, जबकि अधिकांश फलाहार व्रत करते हैं।
प्रमुख शिव मंदिरों में उत्सव
महाशिवरात्रि पर देशभर के प्रमुख शिव मंदिरों जैसे काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी), सोमनाथ मंदिर (गुजरात), महाकालेश्वर मंदिर (उज्जैन), केदारनाथ धाम और बारह ज्योतिर्लिंगों में विशेष श्रृंगार, रुद्राभिषेक और भव्य आयोजन होते हैं। वाराणसी में इस दिन शिव-पार्वती विवाह की प्रतीकात्मक भव्य बारात भी निकाली जाती है, जिसमें भक्त भूत-प्रेत, गण और देवताओं का रूप धारण कर शामिल होते हैं।
निष्कर्ष
महाशिवरात्रि आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक जागरण और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का पावन अवसर है। वर्ष 2027 में यह पर्व 6 मार्च को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। विधिपूर्वक व्रत, पूजा और रात्रि जागरण करने से भक्तों को शिवजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
हर हर महादेव! ॐ नमः शिवाय!
नोट: पूजा मुहूर्त स्थान और पंचांग के अनुसार बदल सकते हैं, कृपया अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि अवश्य करें।