Makar Sankranti 2027

Makar Sankranti 2027 will be celebrated on Thursday, 14 January 2027, marking the Sun’s transition into Makara (Capricorn) and the beginning of the auspicious Uttarayana period. One of the most important Hindu harvest festivals, it is dedicated to Lord Surya (the Sun God) and symbolizes prosperity, gratitude, spiritual growth, and the victory of light over darkness. Devotees observe holy river baths, offer prayers and Arghya to the Sun, donate food, clothes, sesame seeds, and jaggery, and celebrate with traditional delicacies and kite-flying festivities. To help devotees observe this sacred occasion, we have curated a complete Makar Sankranti collection featuring Surya Mantras, Stotras, Puja Vidhi, Aartis, Vrat Katha, devotional articles, and festival traditions, allowing everyone to celebrate this auspicious day with faith and devotion.


मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और शुभ पर्व है, जो सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने के अवसर पर मनाया जाता है। यह पर्व भारत के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। मकर संक्रांति को दान, स्नान, सूर्य उपासना, तिल-गुड़ सेवन और आध्यात्मिक साधना का विशेष पर्व माना जाता है। यह दिन सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है और इसे शुभ कार्यों के आरंभ के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।

मकर संक्रांति 2027 कब है?

वर्ष 2027 में मकर संक्रांति गुरुवार, 14 जनवरी 2027 को मनाई जाएगी। इसी दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह संक्रमण काल अत्यंत पवित्र माना जाता है और इस समय किए गए दान, जप, तप एवं स्नान का विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व

मकर संक्रांति का संबंध भगवान सूर्य नारायण से है। हिंदू मान्यता के अनुसार इस दिन से सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर गमन करते हैं। उत्तरायण को देवताओं का दिन माना गया है और यह काल शुभ एवं पुण्यदायक माना जाता है।

महाभारत में वर्णित है कि भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागने के लिए उत्तरायण काल की प्रतीक्षा की थी। इसी कारण मकर संक्रांति को मोक्ष प्रदान करने वाला पर्व भी कहा जाता है।

सूर्य देव की उपासना का महत्व

मकर संक्रांति के दिन प्रातःकाल पवित्र नदी, सरोवर या तीर्थ में स्नान करके सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करने की परंपरा है। सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है, जो जीवन, ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि प्रदान करते हैं।

सूर्य मंत्र

ॐ घृणिः सूर्याय नमः॥

श्री सूर्य अर्घ्य विधि

आदित्य हृदय स्तोत्र का महत्व

मकर संक्रांति के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। यह स्तोत्र आत्मबल, स्वास्थ्य और सफलता प्रदान करने वाला माना जाता है।

मकर संक्रांति की पौराणिक कथा

एक प्रसिद्ध मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव से मिलने उनके घर मकर राशि में जाते हैं। चूँकि शनि देव मकर राशि के स्वामी हैं, इसलिए इस दिन पिता-पुत्र के मिलन का विशेष महत्व माना जाता है। यह कथा पारिवारिक सौहार्द और संबंधों में मधुरता का संदेश देती है।

मकर संक्रांति पर दान का महत्व

शास्त्रों में इस दिन दान को अत्यंत पुण्यकारी बताया गया है। विशेष रूप से निम्न वस्तुओं का दान शुभ माना जाता है—

  • तिल
  • गुड़
  • कंबल
  • अन्न
  • खिचड़ी
  • घी
  • वस्त्र
  • फल

मान्यता है कि मकर संक्रांति पर किया गया दान कई गुना पुण्य प्रदान करता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ाता है।

मकर संक्रांति के प्रमुख पर्व

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में यह पर्व अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है—

उत्तर भारत

खिचड़ी, तिल-गुड़ और दान का विशेष महत्व होता है।

महाराष्ट्र

लोग एक-दूसरे को तिलगुल देते हुए कहते हैं—

“तिळगुळ घ्या, गोड गोड बोला”

अर्थात तिल-गुड़ ग्रहण करें और मधुर वचन बोलें।

गुजरात

पतंग उत्सव (उत्तरायण) का भव्य आयोजन किया जाता है।

पंजाब

मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व लोहड़ी का उत्सव मनाया जाता है।

तमिलनाडु

यह पर्व चार दिवसीय पोंगल उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

मकर संक्रांति पूजा विधि

  1. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  2. स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  3. सूर्य उदय के समय सूर्य देव को जल अर्पित करें।
  4. तिल, गुड़ और पुष्प अर्पित करें।
  5. सूर्य मंत्र का जप करें।
  6. दान-पुण्य करें।
  7. तिल-गुड़ और खिचड़ी का सेवन करें।
  8. परिवार के साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लें।

मकर संक्रांति पर क्या करें?

  • सूर्य देव की उपासना करें।
  • गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
  • तिल एवं गुड़ का सेवन करें।
  • जरूरतमंदों को दान दें।
  • धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।
  • गायों एवं पक्षियों को भोजन कराएँ।

मकर संक्रांति पर क्या नहीं करें?

  • क्रोध और कटु वचन से बचें।
  • किसी का अपमान न करें।
  • नशे एवं तामसिक भोजन से दूर रहें।
  • दान और सेवा के अवसर को न छोड़ें।

मकर संक्रांति का आध्यात्मिक संदेश

मकर संक्रांति केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि जीवन में प्रकाश, सकारात्मकता और नई ऊर्जा के आगमन का प्रतीक है। यह पर्व हमें अज्ञान, आलस्य और नकारात्मकता को त्यागकर ज्ञान, सेवा, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। सूर्य की भाँति निरंतर कर्म करते हुए समाज और मानवता के कल्याण में योगदान देना ही इस पर्व का वास्तविक संदेश है।

मकर संक्रांति 2027 की शुभकामनाएँ

सूर्य नारायण की दिव्य कृपा से आपके जीवन में स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि, सफलता और आध्यात्मिक उन्नति का प्रकाश सदैव बना रहे। मकर संक्रांति का यह पावन पर्व आपके और आपके परिवार के लिए मंगलमय हो।

॥ मकर संक्रांति 2027 की हार्दिक शुभकामनाएँ ॥ 🌞🙏🪁🪔