Shri Vishnu Mangalashtakam आठ मंगलकारी श्लोकों का एक स्तोत्र है, जिसमें भगवान विष्णु के विभिन्न नामों और स्वरूपों—जैसे पद्मनाभ, माधव, गोविन्द, श्रीधर, लक्ष्मीवल्लभ और शेषशायी नारायण—का स्मरण करते हुए उनके मंगलमय आशीर्वाद की प्रार्थना की जाती है।
इसे शुभ कार्यों, धार्मिक अनुष्ठानों तथा भगवान विष्णु की आराधना के समय विशेष रूप से पढ़ा जाता है। परंपरागत मान्यता है कि इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से जीवन में सुख, समृद्धि, शांति, आध्यात्मिक उन्नति तथा भगवान श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती है और समस्त विघ्न एवं अशुभ प्रभाव दूर होते हैं। कुछ परंपराओं में इसे विष्णु पुराण से संबद्ध भी माना गया है, यद्यपि विभिन्न संस्करण और पाठ-परंपराएँ प्रचलित हैं।
॥ श्रीशाण्डिल्य उवाच ॥
अथ स्तोत्रवरं दिव्यं मङ्गालानां च मङ्गलम् ।
श्रीनन्दनन्दनहरेः कालिन्द्या समुदीरितम् ॥१॥
जय जयाजय मङ्गलश्रुतिगणेन्दुमुखीव्रजसंस्तुत ।
जय जयात्मपदाम्बुजसंश्रितनतसुरेन्द्रमतानुमहेन्दिर ॥२॥
जय जयाजय मङ्गलमङ्गल विकचनीलकुशेशयसुन्दर ।
विधृतकाञ्चनकान्तनवाम्बर विविधभूषणभूषितभूषण ॥३॥
जय जयाजय मङ्गलमङ्गल विकचनीलकुशेशयसुन्दर ।
तव यदाब्जरजोऽभसिता जनाः जगति मङ्गल जयन्ति शुचिप्रभाः ॥४॥
जय जयाजय मङ्गलमङ्गल मुनिवरैः परिणूत्तमहोदय ।
सकलविश्वकुलानि कुलाणुभिस्तव कृतानि वदन्ति मनीषिणः ॥५॥
जय जयाजय मङ्गलमङ्गल जयति मङ्गलमङ्गलमिदं तव ।
तदनु मङ्गलमेव विभूषणं वर सुमाल्यमुखं विधृतं विभो ॥६॥
जय जयाजय मङ्गलमङ्गल व्रजजनीव्रजमङ्गल निजव्रजम् ।
मुरलिका मुकुटं लकुटं स्रजः सकलमेव विभो तव मङ्गलम् ॥७॥
जय जयाजय मङ्गलमङ्गल जगति ते भवनं विपिनं गिरिः ।
सरिदलं वचनं चरितं श्रुतं निखिलमङ्गलमस्ति न चापरम् ॥८॥
जय जयाजय मङ्गलमङ्गल कुरु विभो भवमङ्गलमङ्गलम् ।
तव मुखाम्बुजदर्शनतः परं भवति आर्य सुमङ्गलमङ्गलम् ॥९॥
इति श्रीमङ्गलस्तोत्रं हरेरद्भुतकर्मणः ।
पठेदुषसि यस्तस्य मङ्गलं ह्याष्टयामिकम् ॥१०॥
॥ इति श्रीशाण्डिल्यसंहितायां पञ्चमे भक्तिखण्डे षोडशोऽध्याये श्रीहरिमङ्गलाष्टकं सम्पूर्णम् ॥
इन्हें भी पढ़ें-
श्री हरि स्तोत्रम्
मुकुन्दमाला स्तोत्रम्
🛍️ श्री विष्णु सहस्रनाम पाठ हेतु अनुशंसित पूजन सामग्री
यदि आप नियमित रूप से श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं, तो निम्नलिखित पूजन सामग्री आपकी साधना को अधिक व्यवस्थित और भक्तिमय बना सकती है। अपनी आवश्यकता के अनुसार इन्हें Amazon पर देख सकते हैं।
📖 1. श्री विष्णु सहस्रनाम पुस्तक
स्पष्ट संस्कृत पाठ, हिन्दी अर्थ तथा बड़े अक्षरों वाली पुस्तक दैनिक पाठ के लिए अत्यंत उपयोगी होती है।
📿 2. तुलसी जप माला (108 मनके)
तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। तुलसी की माला से “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का जप करना शुभ माना जाता है।
🪵 3. गोमुखी जप बैग
जप माला को सुरक्षित एवं स्वच्छ रखने तथा पारंपरिक विधि से जप करने के लिए गोमुखी बैग उपयोगी होता है।
🪔 4. पीतल का पूजा दीपक
विष्णु सहस्रनाम पाठ से पूर्व घी या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करना शुभ माना जाता है। पीतल का दीपक दैनिक पूजा के लिए उत्तम विकल्प है।
🌿 5. तुलसी अर्पण पात्र या पीतल की पूजा थाली
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व है। तुलसी अर्पित करने के लिए एक सुंदर पूजा पात्र या थाली उपयोगी रहती है।
🛕 6. भगवान विष्णु की प्रतिमा
घर के मंदिर में भगवान विष्णु अथवा लक्ष्मी-नारायण की प्रतिमा स्थापित कर प्रतिदिन सहस्रनाम का पाठ करना भक्तों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
🔔 7. पीतल की पूजा घंटी
पूजा आरंभ करने से पहले घंटी बजाना सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण भाग है। इससे पूजा का वातावरण अधिक पवित्र और एकाग्रता पूर्ण बनता है।
🪷 8. संपूर्ण पूजा थाली सेट
यदि आप नियमित पूजा करते हैं, तो दीपक, घंटी, अगरबत्ती स्टैंड, रोली पात्र आदि सहित एक संपूर्ण पूजा थाली सेट उपयोगी रहेगा।
📚 9. विष्णु पुराण पुस्तक
भगवान विष्णु के अवतारों, लीलाओं और सनातन धर्म के गूढ़ ज्ञान को समझने के लिए विष्णु पुराण का अध्ययन अवश्य करें।
Affiliate Disclosure: इस लेख में दिए गए कुछ लिंक एफिलिएट लिंक हो सकते हैं। यदि आप इनके माध्यम से कोई खरीदारी करते हैं, तो हमें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के एक छोटा-सा कमीशन प्राप्त हो सकता है। इससे हमें निःशुल्क आध्यात्मिक एवं धार्मिक सामग्री प्रकाशित करने में सहायता मिलती है।
।। हरिः ॐ ।।