श्री विष्णु अष्टोत्तरशतनामावली भगवान श्रीहरि विष्णु के 108 पवित्र एवं दिव्य नामों का संकलन है। प्रत्येक नाम भगवान विष्णु के किसी विशेष गुण, स्वरूप, शक्ति, करुणा और पालनकर्ता रूप का वर्णन करता है। सनातन धर्म में इन 108 नामों का जप एवं पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है और विशेष रूप से विष्णु पूजा, गुरुवार, एकादशी तथा लक्ष्मी-नारायण आराधना के समय इसका पाठ किया जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ श्री विष्णु अष्टोत्तरशतनामावली का पाठ करने से मन को शांति, जीवन में सुख-समृद्धि, पापों का क्षय तथा भगवान श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती है। जो भक्त प्रतिदिन इन नामों का स्मरण करते हैं, उनके जीवन में सकारात्मकता, आध्यात्मिक उन्नति और धर्म के प्रति आस्था निरंतर बढ़ती है।
ओं विष्णवे नमः ।
ओं जिष्णवे नमः ।
ओं वषट्काराय नमः ।
ओं देवदेवाय नमः ।
ओं वृषाकपये नमः ।
ओं दामोदराय नमः ।
ओं दीनबन्धवे नमः ।
ओं आदिदेवाय नमः ।
ओं अदितेस्तुताय नमः । ९
ओं पुण्डरीकाय नमः ।
ओं परानन्दाय नमः ।
ओं परमात्मने नमः ।
ओं परात्पराय नमः ।
ओं परशुधारिणे नमः ।
ओं विश्वात्मने नमः ।
ओं कृष्णाय नमः ।
ओं कलिमलापहारिणे नमः ।
ओं कौस्तुभोद्भासितोरस्काय नमः । १८
ओं नराय नमः ।
ओं नारायणाय नमः ।
ओं हरये नमः ।
ओं हराय नमः ।
ओं हरप्रियाय नमः ।
ओं स्वामिने नमः ।
ओं वैकुण्ठाय नमः ।
ओं विश्वतोमुखाय नमः ।
ओं हृषीकेशाय नमः । २७
ओं अप्रमेयात्मने नमः ।
ओं वराहाय नमः ।
ओं धरणीधराय नमः ।
ओं वामनाय नमः ।
ओं वेदवक्ताय नमः ।
ओं वासुदेवाय नमः ।
ओं सनातनाय नमः ।
ओं रामाय नमः ।
ओं विरामाय नमः । ३६
ओं विरजाय नमः ।
ओं रावणारये नमः ।
ओं रमापतये नमः ।
ओं वैकुण्ठवासिने नमः ।
ओं वसुमते नमः ।
ओं धनदाय नमः ।
ओं धरणीधराय नमः ।
ओं धर्मेशाय नमः ।
ओं धरणीनाथाय नमः । ४५
ओं ध्येयाय नमः ।
ओं धर्मभृतांवराय नमः ।
ओं सहस्रशीर्षाय नमः ।
ओं पुरुषाय नमः ।
ओं सहस्राक्षाय नमः ।
ओं सहस्रपादे नमः ।
ओं सर्वगाय नमः ।
ओं सर्वविदे नमः ।
ओं सर्वाय नमः । ५४
ओं शरण्याय नमः ।
ओं साधुवल्लभाय नमः ।
ओं कौसल्यानन्दनाय नमः ।
ओं श्रीमते नमः ।
ओं रक्षसःकुलनाशकाय नमः ।
ओं जगत्कर्ताय नमः ।
ओं जगद्धर्ताय नमः ।
ओं जगज्जेताय नमः ।
ओं जनार्तिहराय नमः । ६३
ओं जानकीवल्लभाय नमः ।
ओं देवाय नमः ।
ओं जयरूपाय नमः ।
ओं जलेश्वराय नमः ।
ओं क्षीराब्धिवासिने नमः ।
ओं क्षीराब्धितनयावल्लभाय नमः ।
ओं शेषशायिने नमः ।
ओं पन्नगारिवाहनाय नमः ।
ओं विष्टरश्रवसे नमः । ७२
ओं माधवाय नमः ।
ओं मथुरानाथाय नमः ।
ओं मुकुन्दाय नमः ।
ओं मोहनाशनाय नमः ।
ओं दैत्यारिणे नमः ।
ओं पुण्डरीकाक्षाय नमः ।
ओं अच्युताय नमः ।
ओं मधुसूदनाय नमः ।
ओं सोमसूर्याग्निनयनाय नमः । ८१
ओं नृसिंहाय नमः ।
ओं भक्तवत्सलाय नमः ।
ओं नित्याय नमः ।
ओं निरामयाय नमः ।
ओं शुद्धाय नमः ।
ओं नरदेवाय नमः ।
ओं जगत्प्रभवे नमः ।
ओं हयग्रीवाय नमः ।
ओं जितरिपवे नमः । ९०
ओं उपेन्द्राय नमः ।
ओं रुक्मिणीपतये नमः ।
ओं सर्वदेवमयाय नमः ।
ओं श्रीशाय नमः ।
ओं सर्वाधाराय नमः ।
ओं सनातनाय नमः ।
ओं सौम्याय नमः ।
ओं सौम्यप्रदाय नमः ।
ओं स्रष्टे नमः । ९९
ओं विष्वक्सेनाय नमः ।
ओं जनार्दनाय नमः ।
ओं यशोदातनयाय नमः ।
ओं योगिने नमः ।
ओं योगशास्त्रपरायणाय नमः ।
ओं रुद्रात्मकाय नमः ।
ओं रुद्रमूर्तये नमः ।
ओं राघवाय नमः ।
ओं मधुसूदनाय नमः । १०८
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📖 1. श्री विष्णु सहस्रनाम पुस्तक
स्पष्ट संस्कृत पाठ, हिन्दी अर्थ तथा बड़े अक्षरों वाली पुस्तक दैनिक पाठ के लिए अत्यंत उपयोगी होती है।
📿 2. तुलसी जप माला (108 मनके)
तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। तुलसी की माला से “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का जप करना शुभ माना जाता है।
🪵 3. गोमुखी जप बैग
जप माला को सुरक्षित एवं स्वच्छ रखने तथा पारंपरिक विधि से जप करने के लिए गोमुखी बैग उपयोगी होता है।
🪔 4. पीतल का पूजा दीपक
विष्णु सहस्रनाम पाठ से पूर्व घी या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करना शुभ माना जाता है। पीतल का दीपक दैनिक पूजा के लिए उत्तम विकल्प है।
🌿 5. तुलसी अर्पण पात्र या पीतल की पूजा थाली
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व है। तुलसी अर्पित करने के लिए एक सुंदर पूजा पात्र या थाली उपयोगी रहती है।
🛕 6. भगवान विष्णु की प्रतिमा
घर के मंदिर में भगवान विष्णु अथवा लक्ष्मी-नारायण की प्रतिमा स्थापित कर प्रतिदिन सहस्रनाम का पाठ करना भक्तों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
🔔 7. पीतल की पूजा घंटी
पूजा आरंभ करने से पहले घंटी बजाना सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण भाग है। इससे पूजा का वातावरण अधिक पवित्र और एकाग्रता पूर्ण बनता है।
🪷 8. संपूर्ण पूजा थाली सेट
यदि आप नियमित पूजा करते हैं, तो दीपक, घंटी, अगरबत्ती स्टैंड, रोली पात्र आदि सहित एक संपूर्ण पूजा थाली सेट उपयोगी रहेगा।
📚 9. विष्णु पुराण पुस्तक
भगवान विष्णु के अवतारों, लीलाओं और सनातन धर्म के गूढ़ ज्ञान को समझने के लिए विष्णु पुराण का अध्ययन अवश्य करें।
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।। हरिः ॐ ।।