श्रावण मास हिन्दू धर्म के सबसे पवित्र और पुण्यदायी महीनों में से एक माना जाता है। यह महीना विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित है। मान्यता है कि इस पूरे महीने श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान शिव की पूजा, अभिषेक, जप, व्रत और दान करने से जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं तथा मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

श्रावण मास में मंदिरों में “हर हर महादेव” और “ॐ नमः शिवाय” का जयघोष वातावरण को भक्तिमय बना देता है। लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, सोमवार व्रत और कांवड़ यात्रा के माध्यम से भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।


श्रावण मास क्या है?

हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ़ के बाद आने वाला महीना श्रावण कहलाता है। इसका नाम श्रवण नक्षत्र के आधार पर रखा गया है।

उत्तर भारत में यह मास सामान्यतः जुलाई-अगस्त के बीच आता है। इस समय वर्षा ऋतु अपने चरम पर होती है, जिससे प्रकृति हरियाली से भर जाती है। आध्यात्मिक दृष्टि से भी यह समय साधना, जप और तप के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।


📅 श्रावण मास 2026 कब से कब तक है?

हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण मास की तिथियाँ पूर्णिमांत और अमांत पंचांग के कारण अलग-अलग राज्यों में भिन्न होती हैं।

उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग)

  • श्रावण मास प्रारंभ: 30 जुलाई 2026 (गुरुवार)
  • श्रावण मास समाप्त: 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार)

महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना आदि (अमांत पंचांग)

  • श्रावण मास प्रारंभ: 13 अगस्त 2026 (गुरुवार)
  • श्रावण मास समाप्त: 10/11 सितंबर 2026 (पंचांग के अनुसार एक दिन का अंतर हो सकता है)।

📅 श्रावण सोमवार 2026 की तिथियाँ

उत्तर भारत (UP, Bihar, MP, Rajasthan आदि)

श्रावण सोमवारतिथिदिन
पहला सोमवार3 अगस्त 2026सोमवार
दूसरा सोमवार10 अगस्त 2026सोमवार
तीसरा सोमवार17 अगस्त 2026सोमवार
चौथा सोमवार24 अगस्त 2026सोमवार

महाराष्ट्र एवं अन्य अमांत पंचांग वाले राज्य

श्रावण सोमवारतिथिदिन
पहला सोमवार17 अगस्त 2026सोमवार
दूसरा सोमवार24 अगस्त 2026सोमवार
तीसरा सोमवार31 अगस्त 2026सोमवार
चौथा सोमवार7 सितंबर 2026सोमवार

📅 श्रावण मास 2026 के प्रमुख पर्व

पर्वतिथि*
हरियाली तीज16 अगस्त 2026, रविवार
नाग पंचमी17 अगस्त 2026, सोमवार
श्रावण पुत्रदा एकादशी23 अगस्त 2026, रविवार
रक्षा बंधन (श्रावणी पूर्णिमा)28 अगस्त 2026, शुक्रवार

नोट: विभिन्न पंचांगों (द्रिक, पूर्णिमांत, अमांत) में कुछ पर्वों की तिथि में क्षेत्रानुसार अंतर हो सकता है।


श्रावण मास का धार्मिक महत्व

श्रावण मास को भगवान शिव का प्रिय मास कहा जाता है। इसके पीछे अनेक पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं।

1. समुद्र मंथन और हलाहल विष

समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष से सम्पूर्ण सृष्टि संकट में पड़ गई थी। तब भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए उस विष का पान कर लिया।

विष की तीव्रता को शांत करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने भगवान शिव पर जल अर्पित किया। इसी कारण श्रावण मास में शिवलिंग पर जल, दूध और अन्य पवित्र पदार्थों से अभिषेक करने की परंपरा प्रारंभ हुई।


2. माता पार्वती का तप

पौराणिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कई वर्षों तक कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या का फल श्रावण मास में प्राप्त हुआ।

इसी कारण यह महीना विवाह योग्य युवक-युवतियों तथा वैवाहिक सुख की कामना करने वालों के लिए विशेष महत्व रखता है।


3. वर्षा ऋतु और साधना

प्राचीन काल में ऋषि-मुनि वर्षा ऋतु के दौरान एक स्थान पर रहकर वेद, पुराण, यज्ञ, जप और तप करते थे। इसलिए श्रावण मास को आध्यात्मिक साधना का श्रेष्ठ समय माना गया है।


श्रावण मास में क्या करें?

इस महीने में निम्न धार्मिक कार्य अत्यंत शुभ माने जाते हैं।

भगवान शिव का जलाभिषेक

प्रतिदिन अथवा प्रत्येक सोमवार शिवलिंग पर जल अर्पित करें।

यदि संभव हो तो इन पदार्थों से अभिषेक करें—

  • गंगाजल
  • शुद्ध जल
  • दूध
  • दही
  • शहद
  • घी
  • शक्कर
  • गन्ने का रस
  • बेलपत्र
  • धतूरा
  • आक के फूल
  • भांग
  • सफेद पुष्प

महामृत्युंजय मंत्र का जप

श्रावण मास में महामृत्युंजय मंत्र का जप अत्यंत फलदायी माना गया है।


पंचाक्षरी मंत्र का जप

ॐ नमः शिवाय भगवान शिव का सबसे प्रसिद्ध मंत्र है।

प्रतिदिन 108 बार जप करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।


रुद्राभिषेक

यदि संभव हो तो किसी योग्य आचार्य द्वारा रुद्राभिषेक करवाएँ।

ऐसा माना जाता है कि रुद्राभिषेक से—

  • ग्रह दोष कम होते हैं।
  • रोगों में राहत मिलती है।
  • आर्थिक बाधाएँ दूर होती हैं।
  • पारिवारिक सुख बढ़ता है।

शिव चालीसा का पाठ

प्रतिदिन या सोमवार को शिव चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है।

शिव चालीसा पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।


शिव सहस्रनाम

श्रावण मास में शिव सहस्रनाम का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।

शिव सहस्रनाम पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।


शिव अष्टोत्तरशतनामावली

भगवान शिव के 108 नामों का स्मरण भक्त के मन को पवित्र करता है।

शिव अष्टोत्तरशतनामावली पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।


शिव कवच

आध्यात्मिक सुरक्षा एवं भय से मुक्ति के लिए शिव कवच का पाठ किया जाता है।

शिव कवच पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।


श्रावण सोमवार का महत्व

श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को अत्यंत शुभ माना जाता है।

इस दिन भक्त—

  • व्रत रखते हैं।
  • शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं।
  • बिल्वपत्र अर्पित करते हैं।
  • शिव मंत्रों का जप करते हैं।
  • रात्रि में शिव आरती करते हैं।

अविवाहित कन्याएँ योग्य वर की प्राप्ति के लिए तथा विवाहित महिलाएँ अखंड सौभाग्य की कामना से श्रावण सोमवार का व्रत रखती हैं।


श्रावण सोमवार व्रत विधि

  1. प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठें।
  2. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  3. भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
  4. व्रत का संकल्प लें।
  5. शिवलिंग का जलाभिषेक करें।
  6. पंचामृत से अभिषेक करें।
  7. बेलपत्र अर्पित करें।
  8. धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें।
  9. शिव मंत्र का जप करें।
  10. शिव चालीसा एवं आरती करें।
  11. दिनभर सात्त्विक रहें।
  12. सायंकाल पूजा के बाद व्रत का पारण करें।

श्रावण मास में बिल्वपत्र का महत्व

बिल्वपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है।

बिल्वपत्र अर्पित करते समय ध्यान रखें—

  • तीन पत्तियों वाला बिल्वपत्र श्रेष्ठ माना जाता है।
  • पत्तियाँ टूटी हुई न हों।
  • चिकना भाग शिवलिंग की ओर रहे।
  • कीड़े लगे पत्ते न चढ़ाएँ।

श्रावण मास में कांवड़ यात्रा

श्रावण मास की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक परंपराओं में से एक कांवड़ यात्रा है।

भक्त पवित्र नदियों विशेषकर गंगा से जल लाकर अपने निकट स्थित शिव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

इस यात्रा का उद्देश्य केवल जल चढ़ाना ही नहीं बल्कि श्रद्धा, संयम, सेवा और तप का अभ्यास भी है।


श्रावण मास में क्या नहीं करना चाहिए?

श्रावण मास में अनेक लोग कुछ विशेष नियमों का पालन करते हैं।

  • तामसिक भोजन से बचें।
  • शराब और नशे का सेवन न करें।
  • मांसाहार से दूर रहें।
  • असत्य, क्रोध और हिंसा से बचें।
  • किसी का अपमान न करें।
  • ब्रह्मचर्य एवं संयम का पालन करें।
  • स्वच्छता और सात्त्विकता बनाए रखें।

श्रावण मास में दान का महत्व

इस महीने में दान का विशेष महत्व बताया गया है।

दान की जा सकने वाली वस्तुएँ—

  • अन्न
  • वस्त्र
  • छाता
  • जूते-चप्पल
  • फल
  • गौ सेवा
  • जल सेवा
  • गरीबों को भोजन
  • पौधारोपण

दान सदैव अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार करना चाहिए।


श्रावण मास में पढ़े जाने वाले प्रमुख मंत्र एवं स्तोत्र

शिव मंत्र

शिव स्तोत्र


श्रावण मास के आध्यात्मिक लाभ

श्रद्धा और नियमपूर्वक श्रावण मास का पालन करने से शास्त्रों में निम्न लाभ बताए गए हैं—

  • भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
  • मानसिक शांति बढ़ती है।
  • नकारात्मकता कम होती है।
  • आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
  • परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  • मन में भक्ति और वैराग्य का विकास होता है।
  • कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्रावण मास किस भगवान को समर्पित है?

श्रावण मास मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित माना जाता है।

श्रावण सोमवार का क्या महत्व है?

श्रावण के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की विशेष पूजा, व्रत और अभिषेक करने का विधान है।

क्या महिलाएँ श्रावण सोमवार का व्रत रख सकती हैं?

हाँ, अविवाहित और विवाहित दोनों महिलाएँ श्रद्धापूर्वक यह व्रत रख सकती हैं।

क्या श्रावण मास में प्रतिदिन जल चढ़ाना आवश्यक है?

नहीं। यदि संभव न हो तो केवल सोमवार को भी श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक किया जा सकता है।

श्रावण मास में कौन-सा मंत्र सबसे अधिक जपा जाता है?

ॐ नमः शिवाय तथा महामृत्युंजय मंत्र सबसे अधिक लोकप्रिय और पूजनीय मंत्र हैं।


निष्कर्ष

श्रावण मास केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि संयम, साधना, सेवा और आत्मिक उन्नति का महीना है। भगवान शिव अत्यंत भोले और शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव माने गए हैं। इसलिए इस पावन मास में यदि श्रद्धा, विनम्रता और सात्त्विक भाव से उनकी आराधना की जाए, तो भक्त को मानसिक शांति, आध्यात्मिक बल और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का अनुभव हो सकता है।

इस श्रावण मास में नियमित रूप से भगवान शिव के मंत्रों, स्तोत्रों, चालीसा, सहस्रनाम और आरती का पाठ करें, सोमवार का व्रत रखें तथा सेवा, दान और सदाचार को अपने जीवन का अंग बनाएं। यही भगवान भोलेनाथ की सच्ची आराधना है।

हर हर महादेव! 🔱