श्री काली स्तुतिः (ब्रह्मा कृतम्) देवी काली की महिमा का वर्णन करने वाली एक दिव्य स्तुति है, जिसका उल्लेख काली रहस्य में प्राप्त होता है। इस स्तुति में भगवान ब्रह्मा माँ काली की स्तुति करते हुए उन्हें आदिशक्ति, महामाया, कालस्वरूपा तथा समस्त सृष्टि की मूल कारण शक्ति के रूप में प्रणाम करते हैं।

इस स्तोत्र में देवी को ब्रह्मांड की सृजन, पालन और संहार शक्ति कहा गया है। ब्रह्मा जी वर्णन करते हैं कि समस्त देवता, ऋषि तथा योगी भी देवी की अनंत महिमा का पूर्ण वर्णन करने में समर्थ नहीं हैं। माँ काली ही जीवों को अज्ञान से मुक्त कर ज्ञान, शक्ति, निर्भयता और मोक्ष प्रदान करती हैं।

काली उपासना में इस स्तुति का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धा और भक्ति के साथ इसके पाठ से साधक के भीतर देवी के प्रति समर्पण, आत्मबल और आध्यात्मिक जागृति का विकास होता है। विशेष रूप से नवरात्रि, अमावस्या तथा माँ काली की पूजा के अवसर पर इसका पाठ शुभ माना जाता है।

यह स्तुति भक्त को यह अनुभूति कराती है कि माँ काली केवल संहार की देवी नहीं, बल्कि करुणा, संरक्षण, ज्ञान और मुक्ति प्रदान करने वाली परम दिव्य शक्ति हैं।