Shri Vishnu Panjar Stotram भगवान श्री विष्णु की दिव्य कृपा और संरक्षण प्राप्त करने हेतु रचित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है।
‘पञ्जर’ का अर्थ है रक्षा-कवच, इसलिए इस स्तोत्र का पाठ साधक के चारों ओर भगवान विष्णु की दिव्य सुरक्षा का कवच स्थापित करने वाला माना जाता है। इसमें भगवान के विभिन्न स्वरूपों और दिशाओं में उनकी रक्षा-शक्ति का स्मरण किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा और भक्ति के साथ श्री विष्णु पञ्जर स्तोत्र का नियमित पाठ करने से भय, संकट, नकारात्मक शक्तियों एवं बाधाओं से रक्षा होती है, मन में आत्मविश्वास बढ़ता है तथा जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। विशेष रूप से एकादशी, गुरुवार तथा भगवान विष्णु की पूजा के समय इसका पाठ अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
॥ हरिरुवाच ॥
प्रवक्ष्याम्यधुना ह्येतद्वैष्णवं पञ्जरं शुभम् ।
नमोनमस्ते गोविन्द चक्रं गृह्य सुदर्शनम् ॥ १॥
प्राच्यां रक्षस्व मां विष्णो ! त्वामहं शरणं गतः ।
गदां कौमोदकीं गृह्ण पद्मनाभ नमोऽस्त ते ॥ २॥
याम्यां रक्षस्व मां विष्णो ! त्वामहं शरणं गतः ।
हलमादाय सौनन्दे नमस्ते पुरुषोत्तम ॥ ३॥
प्रतीच्यां रक्ष मां विष्णो ! त्वामह शरणं गतः ।
मुसलं शातनं गृह्य पुण्डरीकाक्ष रक्ष माम् ॥ ४॥
उत्तरस्यां जगन्नाथ ! भवन्तं शरणं गतः ।
खड्गमादाय चर्माथ अस्त्रशस्त्रादिकं हरे ! ॥ ५॥
नमस्ते रक्ष रक्षोघ्न ! ऐशान्यां शरणं गतः ।
पाञ्चजन्यं महाशङ्खमनुघोष्यं च पङ्कजम् ॥ ६॥
प्रगृह्य रक्ष मां विष्णो आग्न्येय्यां रक्ष सूकर ।
चन्द्रसूर्यं समागृह्य खड्गं चान्द्रमसं तथा ॥ ७॥
नैरृत्यां मां च रक्षस्व दिव्यमूर्ते नृकेसरिन् ।
वैजयन्तीं सम्प्रगृह्य श्रीवत्सं कण्ठभूषणम् ॥ ८॥
वायव्यां रक्ष मां देव हयग्रीव नमोऽस्तु ते ।
वैनतेयं समारुह्य त्वन्तरिक्षे जनार्दन ! ॥ ९॥
मां रक्षस्वाजित सदा नमस्तेऽस्त्वपराजित ।
विशालाक्षं समारुह्य रक्ष मां त्वं रसातले ॥ १०॥
अकूपार नमस्तुभ्यं महामीन नमोऽस्तु ते ।
करशीर्षाद्यङ्गुलीषु सत्य त्वं बाहुपञ्जरम् ॥ ११॥
कृत्वा रक्षस्व मां विष्णो नमस्ते पुरुषोत्तम ।
एतदुक्तं शङ्कराय वैष्णवं पञ्जरं महत् ॥ १२॥
पुरा रक्षार्थमीशान्याः कात्यायन्या वृषध्वज ।
नाशायामास सा येन चामरान्महिषासुरम् ॥ १३॥
दानवं रक्तबीजं च अन्यांश्च सुरकण्टकान् ।
एतज्जपन्नरो भक्त्या शत्रून्विजयते सदा ॥ १४॥
इति श्रीगारुडे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डे ।
विष्णुपञ्जरस्तोत्रं नाम त्रयोदशोऽध्यायः॥
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📖 1. श्री विष्णु सहस्रनाम पुस्तक
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📿 2. तुलसी जप माला (108 मनके)
तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। तुलसी की माला से “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का जप करना शुभ माना जाता है।
🪵 3. गोमुखी जप बैग
जप माला को सुरक्षित एवं स्वच्छ रखने तथा पारंपरिक विधि से जप करने के लिए गोमुखी बैग उपयोगी होता है।
🪔 4. पीतल का पूजा दीपक
विष्णु सहस्रनाम पाठ से पूर्व घी या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करना शुभ माना जाता है। पीतल का दीपक दैनिक पूजा के लिए उत्तम विकल्प है।
🌿 5. तुलसी अर्पण पात्र या पीतल की पूजा थाली
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व है। तुलसी अर्पित करने के लिए एक सुंदर पूजा पात्र या थाली उपयोगी रहती है।
🛕 6. भगवान विष्णु की प्रतिमा
घर के मंदिर में भगवान विष्णु अथवा लक्ष्मी-नारायण की प्रतिमा स्थापित कर प्रतिदिन सहस्रनाम का पाठ करना भक्तों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
🔔 7. पीतल की पूजा घंटी
पूजा आरंभ करने से पहले घंटी बजाना सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण भाग है। इससे पूजा का वातावरण अधिक पवित्र और एकाग्रता पूर्ण बनता है।
🪷 8. संपूर्ण पूजा थाली सेट
यदि आप नियमित पूजा करते हैं, तो दीपक, घंटी, अगरबत्ती स्टैंड, रोली पात्र आदि सहित एक संपूर्ण पूजा थाली सेट उपयोगी रहेगा।
📚 9. विष्णु पुराण पुस्तक
भगवान विष्णु के अवतारों, लीलाओं और सनातन धर्म के गूढ़ ज्ञान को समझने के लिए विष्णु पुराण का अध्ययन अवश्य करें।
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।। हरिः ॐ ।।