🕉
Bhakti
आपकी भक्ति यात्रा का केंद्र
  • मुख्य पृष्ठ
  • चालीसा संग्रह
  • आरती संग्रह
  • स्तुति संग्रह
  • Blog
🕉
श्री शिव जी

जय रामेश्वर जय नागेश्वर वैद्यनाथ केदार हरे / Jai Raneshwar Jai Nageshwar

26 June 2026

जय शिवशंकर जय गंगाधर करूणाकर करतार हरे।
जय कैलाशी जय अविनाशी सुखराशी सुखसार हरे।
जय शशिशेखर जय डमरूधर जय जय प्रेमागार हरे।
जय त्रिपुरारी जय मदहारी नित्य अनन्त अपार हरे।
निर्गुण जय जय सगुण अनामय निराकार साकार हरे।
पारवती पति हर-हर शम्भो पाहि-पाहि दातार हरे।।

जय रामेश्वर जय नागेश्वर वैद्यनाथ केदार हरे।
मल्लिकार्जुन सोमनाथ जय महाकार ओंकार हरे।
जय त्रयम्बकेश्वर जय भुवनेश्वर भीमेश्वर जगतार हरे।
काशीपति श्री विश्वनाथ जय मंगलमय अधहार हरे।
नीलकंठ जय भूतनाथ जय मृतुंजय अविकार हरे।
पारवती पति हर-हर शम्भो पाहि-पाहि दातार हरे।।

भोलानाथ कृपालु दयामय अवढर दानी शिवयोगी।
निमिष मात्र में देते है नवनिधि मनमानी शिवयोगी।
सरल हृदय अति करूणासागर अकथ कहानी शिवयोगी।
भक्तों पर सर्वस्व लुटाकर बने मसानी शिवयोगी।
स्वयं अकिंचन जन मन रंजन पर शिव परम उदार हरे।
पारवती पति हर-हर शम्भो पाहि-पाहि दातार हरे।।

आशुतोष इस मोहमयी निद्रा मुझे जगा देना।
विषय वेदना से विषयों की मायाधीश छुड़ा देना।
रूप सुधा की एक बूद से जीवन मुक्त बना देना।
दिव्य ज्ञान भण्डार युगल चरणों की लगन लगा देना।
एक बार इस मन मन्दिर में कीजे पद संचार हरे।
पारवती पति हर-हर शम्भो पाहि-पाहि दातार हरे।।

दानी हो दो भिक्षा में अपनी अनपायनी भक्ति विभो।
शक्तिमान हो दो अविचल निष्काम प्रेम की शक्ति प्रभो।
त्यागी हो दो इस असार संसारपूर्ण वैराग्य प्रभो।
परम पिता हो दो तुम अपने चरणों में अनुराण प्रभो।
स्वामी हो निज सेवक की सुन लीजे करूण पुकार हरे।
पारवती पति हर-हर शम्भो पाहि-पाहि दातार हरे।।

तुम बिन व्यकुल हूँ प्राणेश्वर आ जाओ भगवन्त हरे।
चरण कमल की बॉह गही है उमा रमण प्रियकांत हरें।
विरह व्यथित हूँ दीन दुखी हूँ दीन दयाल अनन्त हरे।
आओ तुम मेरे हो जाओ आ जाओ श्रीमंत हरे।
मेरी इस दयनीय दशा पर कुछ तो करो विचार हरे।
पारवती पति हर-हर शम्भो पाहि-पाहि दातार हरे।।

जय महेश जय जय भवेश जय आदि देव महादेव विभो।
किस मुख से हे गुणातीत प्रभुत तव अपार गुण वर्णन हो।
जय भव तारक दारक हारक पातक तारक शिव शम्भो।
दीनन दुःख हर सर्व सुखाकर प्रेम सुधाकर की जय हो।
पार लगा दो भवसागर से बनकर करूणा धार हरे।
पारवती पति हर-हर शम्भो पाहि-पाहि दातार हरे।।

← श्री सरस्वती स्तोत्रम् | वाणी स्तवनं / Shri Saraswati Stotram
श्री सूर्य देव चालीसा / Shri Surya Dev Chalisa →

🕉 श्री शिव जी के अन्य ग्रंथ

📖

शिव चालीसा / Shiv Chalisa

→
🕉

श्री वेदसार शिव स्तोत्रम / Vedasara Shiv Stotram

→
🕉

शिव पंचाक्षर स्तोत्र / Shiv Panchakshar Stotra

→
🕉

लिंगाष्टकम् / Lingashtakam

→
🪔

शिव जी की आरती / Shiv Aarti

→
🕉

आशुतोष शशाँक शेखर / Ashutosh Shashank Shekhar

→

🔍 खोजें

📚 संग्रह

🙏 स्तुती 21 📖 चालीसा संग्रह 11 🪔 आरती संग्रह 10 🕉 Blog 2

🕉 देवी-देवता

🕉️ श्री हनुमान जी → 🔱 श्री शिव जी → 🪈 श्री कृष्ण जी → 🌸 माँ दुर्गा → 🕉️ श्री गणेश जी → 🏹 श्री राम जी → 🪷 माँ लक्ष्मी →

🕐 हाल की पोस्ट

🕉 सूर्य सहस्रनाम / Surya Sahasranaam 🕉 सूर्यकवचम / Surya Kavacham 🕉 सूर्य अष्टकम / Surya Ashtakam 🪔 श्री सूर्य देव आरती / Shri Surya Dev Aarti 📖 श्री सूर्य देव चालीसा / Shri Surya Dev Chalisa 🕉 जय रामेश्वर जय नागेश्वर वैद्यनाथ केदार हरे / Jai Raneshwar Jai Nageshwar
🕉 Bhakti

आपकी भक्ति यात्रा का केंद्र

हमारे साथ अपनी भक्ति यात्रा को और भी सुंदर बनाएं। यहाँ आपको विभिन्न देवी-देवताओं की चालीसाएँ, आरतियाँ, स्तुतियाँ और त्यौहारों की जानकारी मिलेगी।

देवी-देवता

  • 🕉️ श्री हनुमान जी
  • 🔱 श्री शिव जी
  • 🪈 श्री कृष्ण जी
  • 🌸 माँ दुर्गा
  • 🕉️ श्री गणेश जी
  • 🏹 श्री राम जी

संग्रह

  • 📖 चालीसा संग्रह
  • 🪔 आरती संग्रह
  • 🙏 स्तुति संग्रह
  • 📿 मंत्र संग्रह
  • 📚 कथाएँ

त्यौहार

  • 🎊 नवरात्रि
  • 🪔 दीपावली
  • 🎨 होली
  • 🪈 जन्माष्टमी
  • 🕉️ गणेश चतुर्थी
  • 🔱 महाशिवरात्रि
ॐ © 2026 Bhakti — सर्वाधिकार सुरक्षित | गोपनीयता नीति जय श्री राम 🙏