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माँ सरस्वती

श्री सरस्वती सहस्त्रनाम / Shri Saraswati Sahastranaam

25 June 2026

॥ ध्यानम् ॥
श्रीमच्चन्दनचर्चितोज्ज्वलवपुःशुक्लाम्बरामल्लिका
मालालालितकुन्तला प्रविल सन्मुक्तावली शोभना।
सर्वज्ञान निधान पुस्तकधरा रुद्राक्षमालाङ्किता
वाग्देवी वदनाम्बुजा वसतु मे त्रैलोक्यमाता शुभा॥१॥

॥ श्री नारद उवाच ॥
भगवन् परमेशान सर्वलोकैक नायक।
कथं सरस्वती साक्षात्प्रसन्ना परमेष्ठिनः॥२॥

कथं देव्या महावाण्या सतत्प्राप सुदुर्लभम्।
एतन्मे वद तत्वेन महायोगीश्वर प्रभो॥३॥

॥ श्रीसनत्कुमार उवाच ॥
साधु पृष्ठं त्वया ब्रह्मन् गुह्याद्गुह्यं अनुत्तमम्।
मयानुगोपितं यत्नात् इदानीं तत्प्रकाश्यते॥४॥

पूरा पितामहं दृष्ट्वा जगत्स्थावर जङ्गमम्।
निर्विकारं निराभासं स्तभी भूतं अचेतसम्॥५॥

सृष्ट्वा त्रैलोक्यमखिलं वागभावात्तथा विधम्।
आधिक्या भावतः स्वस्य परमेष्ठी जगद्गुरुः॥६॥

दिव्य वर्षायुतं तेन तपो दुष्कर मुत्तमम्।
ततः कदाचित् संजाता वाणी सर्वार्थ शोभिता॥७॥

अहमस्मि महाविद्या सर्व वाचा मधीश्वरी।
मम नाम्नां सहस्रं तु उपदेक्ष्यामि अनुत्तमम्॥८॥

अनेन संस्तुता नित्यं पत्नी तव भवाम्यहम्।
त्वया सृष्टं जगत्सर्वं वाणीयुक्तं भविष्यति॥९॥

इदं रहस्यं परमं मम नाम सहस्रकम्।
सर्व पापौघ शमनं महा सारस्वत प्रदम्॥१०॥

महाकवित्वदं लोके वागीशत्व प्रदायकम्।
त्वं वा परः पुमान्यस्तु स्तवेन अनेन तोषयेत्॥११॥

तस्याहं किंकरी साक्षात् भविष्यामि न संशयः।
इत्युक्त्वा अन्तर्दधे वाणी तदारभ्य पितामहः॥१२॥

स्तुत्वा स्तोत्रेण दिव्येन तत्पतित्वंमवाप्तवान्।
वाणीयुक्तं जगत्सर्वं तदारभ्या भवन्मुने॥१३॥

तत्तेहं संप्रवक्ष्यामि शृणु यत्नेन नारद।
सावधानमना भूत्वा क्षणं शुद्धो मुनीश्वरः॥१४॥

वाग्वाणी वरदा वन्द्या वरारोहा वरप्रदा।
वृतिर्वागीश्वरी वार्ता वरा वागीश वल्लभा॥१॥

विश्वेश्वरी विश्ववन्द्या विश्वेश प्रियकारिणी।
वाग्वादिनी च वाग्देवी वृद्धिदा वृद्धिकारिणी॥२॥

वृद्धिर्वृद्धा विषघ्नी च वृष्टिर्वृष्टि प्रदायिनी।
विश्वाराध्या विश्वमाता विश्वधात्री विनायका॥३॥

विश्वशक्तिर्विश्वपारा विश्वा विश्वविभावरी।
वेदान्तवेदिनी वेद्या वित्ता वेदत्रयात्मिका॥४॥

वेदज्ञा वेदजननी विश्वा विश्वविभावरी।
वरेण्या वाङ्मयी वृद्धा विशिष्ट प्रियकारिणी॥५॥

विश्वतोवदना व्याप्ता व्यापिनी व्यापकात्मिका।
व्याळघ्नी व्याळभूषाङ्गी विरजा वेदनायिका॥६॥

वेदवेदान्त संवेद्या वेदान्त ज्ञानरूपिणी।
विभावरी च विक्रन्ता विश्वामित्रा विधिप्रिया॥७॥

वरिष्ठा  विप्रकृष्टा  च  विप्रवर्यप्रपूजिता।
वेदरूपा वेदमयि वेदमूर्तिश्च वल्लाभा॥८॥

गौरी गुणवती गोप्या गन्धर्वनगरप्रिया।
गुणमाता गुहान्तस्था गुरुरूपा गुरुप्रिया॥९॥

गिरिविद्या गानतुष्टा गायक प्रियकारिणी।
गायत्री गिरिशाराध्या गीर्गिरीश प्रियङ्करी॥१०॥

गिरिज्ञा ज्ञानविद्या च गिरिरूपा गिरीश्वरी।
गीर्माता गणसंस्तुत्या गणनीय गुणान्विता॥११॥

गूढरूपा गुहा गोप्या गोरूपा गौर्गुणात्मिका।
गुर्वी गुर्वम्बिका गुह्या गेयजा गृहनाशिनी॥१२॥

गृहिणी गृहदोषघ्नी गवघ्नी गुरुवत्सला।
गृहात्मिका गृहाराध्या गृहबाधा विनाशिनी॥१३॥

गङ्गा गिरिसुता गम्या गजयाना गुहस्तुता।
गरुडासन संसेव्या गोमती गुणशालिनी॥१४॥

शारदा शाश्वती शैवी शांकरी शंकरात्मिका।
श्रीश्शर्वाणी शतघ्नी च शरच्चंद्र निभानना॥१५॥

शर्मिष्ठा शमनघ्नी च शतसाहस्र रूपिणी।
शिवा शम्भुःप्रिया श्रद्धा श्रुतिरूपा श्रुतिप्रिया॥१६॥

शुचिष्मती शर्मकरी शुद्धिदा शुद्धिरूपिणी।
शिवाशिवंकरीशुद्धा शिवाराध्याशिवात्मिका॥१७॥

श्रीमती श्रीमयी श्राव्या श्रुतिः श्रवणगोचारा।
शान्तिश्शान्तिकरीशान्ता शान्ताचारप्रियंकरी॥१८॥

शीललभ्या शीलवती श्रीमाता शुभकारिणी।
शुभवाणी शुद्धविद्या शुद्धचित्त प्रपूजिता॥१९॥

श्रीकरी श्रुतपापघ्नी शुभाक्षी शुचिवल्लभा।
शिवेतरघ्नी शबरी श्रवणीय गुणान्विता॥२०॥

शौरी शिरीषपुष्पाभा शमनिष्ठा शमात्मिका।
शमान्विता शमाराध्या शितिकण्ठ प्रपूजिता॥२१॥

शुद्धिः शुद्धिकरी श्रेष्ठा श्रुतानन्ता शुभावहा।
सरस्वाती च सर्वज्ञा सर्वसिद्धि प्रदायिनी॥२२॥

सरस्वती च सावित्री सन्ध्या सर्वेप्सितप्रदा।
सर्वार्तिघ्नी सर्वमयी सर्वविद्या प्रदायिनी ॥२३॥

सर्वेश्वरी सर्वपुण्या सर्गस्थित्यन्तकारिणी।
सर्वाराध्या सर्वमाता सर्वदेव निषेेविता॥२४॥

सर्वैश्वर्य प्रदा सत्या सती सत्व गुणाश्रया।
स्वरक्रम पदाकारा सर्वदोष निषूदिनी॥२५॥

सहस्राक्षी सहस्रास्या सहस्रपद संयुता।
सहस्रहस्ता साहस्र गुणालंकृत विग्रहा॥२६॥

सहस्रशीर्ष सद्रूपा स्वधा स्वाहा सुधामयी।
षड्ग्रन्थिभेदिनी सेव्या सर्वलोकैक पूजिता॥२७॥

स्तुत्या स्तुतिमयि साध्या सवितृ प्रियकारिणी।
संशयच्छेदिनी सांख्यवेद्या संख्या सदीश्वरी॥२८॥

सिद्धिदा सिद्धसम्पूज्या सर्वसिद्धि प्रदायिनी।
सर्वज्ञा सर्वशक्तिश्च सर्वसम्पत् प्रदायिनी॥२९॥

सर्वाशुभघ्नी सुखदा सुखा संवित्स्व रूपिणी।
सर्वसंभीषिणी सर्वजगत् सम्मोहिनी तथा॥३०॥

सर्वप्रियंकरी सर्वशुभदा सर्वमङ्गळा ।
सर्वमन्त्रमयी सर्वतीर्थ पुण्यफलप्रदा॥३१॥

सर्व पुण्यमयी सर्वव्याधिघ्नी सर्वकामदा।
सर्वविघ्नहरी सर्ववन्दिता सर्वमङ्गला॥३२॥

सर्वमन्त्रकरी सर्वलक्ष्मीस्सर्वगुणान्विता।
सर्वानन्दमयी सर्वज्ञानदा सत्यनायिका॥३३॥

सर्वज्ञानमयी सर्वराज्यदा सर्वमुक्तिदा।
सुप्रभा सर्वदा सर्वा सर्वलोक वशंकरी ॥३४॥

सुभगा सुन्दरी सिद्धा सिद्धाम्बा सिद्धमातृका।
सिद्धमाता सिद्धविद्या सिद्धेशी सिद्धरूपिणी॥३५॥

सुरूपिणी सुखमयी सेवक प्रियकारिणी।
स्वामिनी सर्वदा सेव्या स्थूल सूक्ष्मा पराम्बिका॥३६॥

साररूपा सरोरूपा सत्यभूता समाश्रया।
सितासिता सरोजाक्षि सरोजासन वल्लभा॥३७॥

सरोरुहाभा सर्वाङ्गी सुरेन्द्रादि प्रपूजिता।
महादेवी महेशानी महासारस्वतप्रदा॥३८॥

महासरस्वती मुक्ता मुक्तिदा मलनाशिनी।
महेश्वरी महानन्दा महामन्त्रमयी मही॥३९॥

महालक्ष्मीर्महाविद्या माता मन्दरवासिनी।
मन्त्रगम्य मन्त्रमाता महामन्त्र फलप्रदा॥४०॥

महामुक्तिर्महानित्या महासिद्धि प्रदायिनी।
महासिद्धा महामाता महदाकार संयुता॥४१॥

महा महेश्वरी मूर्तिः मोक्षदा मणिभूषणा।
मेनका मानिनी मान्या मृत्युघ्नी मेरुरूपिणी॥४२॥

मदिराक्षी मदावासा मखरूपा मखेश्वरी।
महामोहा महामाया मातृणां मूर्ध्नि संस्थिता॥४३॥

महापुण्या मुदावासा महासम्पत् प्रदायिनी।
मणिपूरैकनिलया  मधुरूपा  महोत्काटा॥४४॥

महासूक्ष्मा महाशान्ता महाशान्ति प्रदायिनी।
मुनिस्तुता मोहहन्त्री माधवी माधवप्रिया॥४५॥

मा महादेव संस्तुत्या महिषीगणपूजिता।
मृष्टान्नदा च माहेन्द्री महेन्द्रपद दायिनी॥४६॥

मतिर्मतिप्रदा मेधा मर्त्यलोक निवासिनी।
मुख्या महानिवासा च महाभाग्य जानाश्रिता॥४७॥

महिळा महिमा मृत्युहारी मेधा प्रदायिनी।
मेध्या महावेगवती महामोक्ष फलप्रदा॥४८॥

महाप्रभाभा महती महादेव प्रियङ्करी।
महापोषा महर्धिश्च मुक्ताहार विभूषणा॥४९॥

माणिक्यभूषणा मन्त्रा मुख्यचन्द्रार्ध शेखरा।
मनोरूपा मनःशुद्धिः मनःशुद्धिप्रदायिनी॥५०॥

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